पंचायती जमीन: मालिकाना हक कब्जेदारों को देने की तैयारी में खट्टर सरकार

Haryana News चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पंचायती जमीन (पंचायती जमीन) पर कब्जा किए बैठे लोगों को जमीन का मालिकाना हक देने का मन बना लिया है। किसान संगठनों के साथ बैठक के बाद सरकार ने कानून में संशोधन के लिए कमेटी गठित कर दी है।

Manohar lal khattra

सूत्रों के मुताबिक सरकार कानून में संशोधन करने जा रही है। इसके तहत जिसका जितना पुराना कब्जा होगा उसे उतनी ही रियायत कलेक्टर रेट में देकर जमीन का मालिकाना हक दे दिया जाएगा। | वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है वह ताजा कानून के हिसाब से दिया है।

पंचायती जमीन: अब पंचायत की जमीन पर मिलेगा मालिकाना हक

ऐसी संपत्तियों में प्रदेश की लाखों एकड़ जमीन आती है। बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि आधा फरीदाबाद और गुरुग्राम ऐसी जमीनों पर बसा है। लोग कई सालों से यहां कारोबार कर रहे हैं। इन जमीनों में जुमला मालकान, मुश्तरका मालकान, शामलात देह, जुमला मुश्तरका मालकान, आबादकार, पट्टेदार, ढोलीदार, बुटमीदार व मुकरीरदार व अन्य लाखों काश्तकारों की संपत्तियां आती हैं। मामले का स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार नया कानून बनाने जा रही है। पुराने कानूनों का अध्ययन करने और नए कानून तैयार करने के लिए विशेष कमेटी गठित की हुई है। इसमें मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, विकास एवं पंचायत मंत्री, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री और महाअधिवक्ता शामिल हैं। कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं और अधिकारियों को कानून का प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

यह कार्य अंतिम चरण में है, जल्द ही इससे संबंधित विधेयक विधानसभा में लाया जाएगा यह एलान प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया वह बुधवार को यहां उनके आवास संत कबीर कुटीर पर उनसे मुलाकात करने आए भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि सुरेश काँथ, अमरजीत मोहड़ी मनदीप नाथवान आदि के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक में कृषि मंत्री जेपी दलाल के साथ-साथ तमाम विभागों के आला अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने अपनी कई मांगें रखीं, जिन पर सहमति बन गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान यूनियन के वकील भी कमेटी को सुझाव दे सकते हैं। मनोहर लाल ने कहा कि जो किसान वर्षों से ऐसी जमीनों पर मकान बनाकर रह रहे हैं या खेती कर रहे हैं, उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा। उनसे जमीन नहीं छुड़वाई जाएगी। लेकिन सरकार ने सख्ती की है, ताकि इस प्रकार का कोई नया कब्जा न हो सके।

सुप्रीम कोर्ट दे चुका कब्जे खाली कराने के आदेश

शामलात जमीनों पर कब्जे को लेकर अप्रैल 2022 में सुप्रीम कोर्ट फैसला दे चुका है कि जो जमीन कभी भी शामलात देह थी और बाद में उस जमीन को लोगों ने अपने नाम करा लिया, वह वापस पंचायत या निकाय संस्थाओं के पास जाएगी। जिन लोगों ने जमीनें अपने नाम कराई हैं, उनके नाम भी राजस्व रिकार्ड से हटाए जाएंगे। इस फैसले को लागू करने को लेकर भी हरियाणा सरकार सभी जिलों के डीसी को आदेश दे चुकी है। लेकिन भारी विरोध के चलते फिलहाल सरकार ने इस आदेश को लागू करने से रोक रखा है। क्योंकि प्रदेश में ऐसे लोगों की संख्या लाखों में है। इसलिए सरकार नया कानून बना रही है।

जुमला मुश्तरका मालकान भूमि

ये वो जमीनें हैं जिन्हें गांव के लोगों ने चकबंदी से पहले सामाजिक कार्यों जैसे गोशाला, तालाब व अन्य किसी काम के लिए छोड़ा था। इनमें से जो जमीन प्रयोग के बाद बची वो उन्हीं काश्तकारों ने अपने नाम करा लीं, जिन्होंने ये जमीन दी गई थीं। इन्हीं जमीनों को जुमला मुश्तरका मालकान भूमि कहा जाता है। इसी प्रकार, शामलात देह जमीन वो होती है, जो सामुदायिक उपयोग के लिए छोड़ी गई थीं।

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