Rewari News- हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहाः विद्रोही

Rewari News रेवाड़ी। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि हरियाणा के हजारों सरकारी कर्मचारियों को दिसंबर माह का वेतन नहीं मिला, जिसके चलते इन कर्मचारियों को अपने घर के रोजमर्रा के खर्चे चलाने के लिए भारी परेशानी हो रही है।

वेदप्रकाश विद्रोही
वेदप्रकाश विद्रोही

विद्रोही ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सुशासन का दावा करते हैं वही बड़े आश्चर्य की बात है कि सुशासन का दावा करने वाली हरियाणा सरकार में कई विभागों के सभी श्रेणियों के कर्मचारियों का दिसंबर मास का वेतन ई-पोस्टिंग पर स्वीकृत पदों की 80 प्रतिशत पूर्ती ना होने के कारण रोक दिया गया है और निकट भविष्य में वेतन निकलने के कोई आसार भी नजऱ नहीं आते। यह बड़ी विचित्र विडंबना है कि किसी की गलती का खामियाजा सभी कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।

लोन की किश्त नहीं चुका पा रहे कर्मचारी…

विद्रोही ने कहा ऐसे अनगिनत कर्मचारी हैं जिन्होंने या तो विभाग से अथवा अन्य बेंकों से मकान के लिए या अन्य किसी कारण से लोन लिया हुआ है जिसकी मासिक किश्त लगभग मॉस के प्रथम सप्ताह में संबंधित बैंकों को देनी होती है। ऐसे सभी कर्मचारी बड़ी विकट समस्या से जूझ रहे है क्योंकि समय पर किश्त ना दे पाने के कारण उन पर किश्त के ब्याज का अतिरिक्त बोझ और पडेगा। इसी के साथ शिक्षा विभाग के सभी श्रेणी के अध्यापकों पर शिक्षा विभाग की गाज गिरी हुई है जिनसे इस कडाके की सर्दी में शरद अवकाश घोषित किये जाने के बावजूद 10वीं और 12वीं की बोर्ड कक्षाओं को पढ़ाने की आड़ में परिवार पहचान पत्र का कार्य करवाया जा रहा है। जिसका सभी वर्ग के अध्यापकों द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है और सभी वर्ग के कर्मचारियों में बहुत भारी रोष व्याप्त है। किन्तु मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट बताकर विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा सभी अध्यापकों पर इस कार्य को पूरा करने का दबाव बनाया हुआ है।

सर्दी में शिक्षक परेशान

विद्रोही ने कहा कि एक ओर वेतन ना मिल पाने और दूसरी और कडाके की सर्दी में परिवार पहचान पत्र के कार्य को पूरा करने को लेकर सभी शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हैं। सवाल उठता है मानसिक रुप से परेशान अध्यापक, कर्मचारी कैसे ओर कितना काम कर पा रहे होंगे। मुख्यमंत्री महोदय को चाहिए कि वे अपने सभी कर्मचारियों का वेतन समय पर निकलवाने के तत्काल आदेश जारी करें। खैर सरकार कि करनी और कथनी के अंतर का इस प्रदेश की जनता को भली भांति पता है। अभी अगस्त 2022 में शिक्षा विभाग द्वारा किये गए शिक्षकों व् प्राचार्यों के तबादलों में प्रत्येक जिले के काफी स्कूलों में कम छात्र संख्या का हवाला देते हुए उन पदों को केपट श्रेणी में रख दिया गया। जिस कारण बहुत से शिक्षकों तथा प्राचार्यों व मुख्याध्यापकों को अपने गृह जिले से दूर जाना पडा। किन्तु अभी हाल ही में जारी प्राचार्यों कि पदोन्नति सूची में उन्ही विद्यालयों में प्राचार्यों के पदों को रिक्त स्थान में दर्शाया गया है जिन्हें अगस्त मॉस में हुए तबादलों के दौरान कम छात्र संखा का हवाला देते हुए केपट की श्रेणी में रखा गया था।

विद्रोही ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वह इन सभी विसंगतियों को तत्काल प्रभाव से दूर करवाएं और केवल दोषी को दण्डित करें ना कि सभी को एक लाठी से हाके। छात्रो की सलाना बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से दूर रखे ताकि वे बच्चों की पढ़ाई अच्छे ढंग से करवाने की अपनी पहली प्राथमिकता को सही रुप से निभा सके। विद्रोही ने मुख्यमंत्री व सरकार न भूलें अध्यापकों की प्राथमिक जबाबदेही, जिम्मेदारी छात्रों को समुचित, प्रभावी, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने की हे न कि सरकार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं, एजेंडे की पूर्ति के लिए अध्यापन कार्य छोडक़र अन्य सरकारी कामों की बेगार करना है।

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