Sarson Ki Fasal – सरसों में तेजी से बढ़ रहा सफेद रोली रोग, पैदावार घटने की संभावना

Sarson Ki Fasal नई दिल्ली । इस बार सरसों की फसल से किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद है, लेकिन फसल में होने वाला रोग सफेद रोली किसानों के लिए मुसीबत बन रहा है। वहीं फसल में चेपा लगने की भी संभावना बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सम्पूर्ण जिले में अभी तक चार-पांच प्रतिशत से ज्यादा सरसों की फसल में सफेद रोली बीमारी फैल गई है, जो फसल के लिए काफी हद तक नुकसानदायक है।

सरसों की फसल में सफेद रोली रोग
सरसों की फसल में सफेद रोली रोग

बावल कृषि केन्द्र के कीट वैज्ञानिक डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि यह बीमारी लगातार कोहरा रहने की अवस्था में सरसों की फसल में पनपती है, जोकि फसल के लिए काफी हद तक नुकसानदायक रहती है। ऐसे में पैदावार भी घट जाती है। फसल के पत्तों पर सफेद परत जमना, फलियां सिकुड़कर जलेबी की आकार की हो जाना इस बीमारी के लक्षण हैं। उन्‍होंने बताया कि यह रोग जब पत्तों में लगता है तो उसे सफेद रोली कहते हैं। वहीं अगर सरसों की फलियों में लगता है तो इसे मरोड़िया कहते हैं।

उन्‍होंने सफेद रोली से बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि यह बीमारी धूप खिलने के साथ हल्की पड़कर धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। अगर ऐसा नहीं होता है तो 250-300 लीटर पानी में 500-600 ग्राम मैंकोजेब दवाई मिलाकर सरसों की फसल का छिड़काव करें, ताकि यह रोग जड़ से खत्म हो जाए। उन्होंने बताया कि जिले में पिछले 10-15 दिन से लगातार धुंध की स्थिति बनी हुई थी, इसकी वजह से लगभग चार-पांच प्रति​शत सरसों की फसल इस रोग से प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि यह रोग पत्तों में दिसंबर के समय लगता है लेकिन फलियों में जनवरी के दौरान प्रकट होने की सभावना रहती है। जिन किसानों के खेतों में नमी है और फसल ज्यादा प्रभावित है, उन्हें इसकी दवा का तुरंत छिड़काव करना चाहिए।

-सरसों को चेपा से बचाने की सलाह

कृषि ​अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि किसान सरसों की फसल को चेपा लगने से बचाएं। चेपा फसल की फलियों, फूलों व कलियों की टहनियों पर लगकर उसका रस चूसता है। इसका अधिकतर आक्रमण जनवरी के प्रथम पखवाड़े में होता है। जब ओसत तापमान 10 से 20 डिग्री सेंटीग्रेड व 75 प्रतिशत हिमीडिटी होती है। फिल्हाल सरसों के साथ अन्य फसलों में भी इसकी संभावना ज्यादा है। इससे पैदावार में काफी मात्रा में असर पड़ता है। फसल में से रस चूसने से दानों व फूट करने की यानी दोनों का प्रतिशत कम हो जाता है। उन्होंने इससे बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि ऐसे में टहनियों को तोड़कर नष्ट करें, अगर एक पौधे पर 30 से ज्यादा कीट हैं तो कीटनाशक छिड़कें। इसकी रोकथाम के लिए चेपा रोधक दवा मेटासिस्टोल, रोगोरे या मैंलाथियान नामक दवा का प्रति एकड़ दो लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें। हरे चारे वाले खेत में छिड़काव करने पर पशुओं को एक सप्ताह तक उस खेत का चारा न खिलाएं। वहीं साग के लिए उगाई गई सरसों के लिए 250 से 400 एमएल मैंलाथियान 250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। अगर जरूरत हो तो 15 दिन में दोबारा फिर छिड़काव करें।

वर्जनः

सफेद रोली रोग से सरसों की फसल में पैदावार घटती है। पत्तों पर सफेद परत जमना व फलियां जलेबी की आकार की तरह मुड़ जाना इसके लक्षण हैं। इससे बचाव के लिए 250-300 लीटर पानी में 500-600 ग्राम मैंकोजेब दवाई मिलाकर सरसों की फसल का छिड़काव करें ताकि यह रोग जड़ से खत्म हो जाए।

-डॉ. बलबीर सिंह, कीट वैज्ञानिक कृषि केन्द्र बावल।

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सरसों की फसल में चेपा लगने से वह पेड़ का रस चूस लेता है। इससे पैदावार घटती है। जनवरी के प्रथम पखवाड़े में इसकी संभावना बढ़ जाती है। इससे बचाव के लिए फसल की टहनियों को तोड़कर नष्ट करदें। साग के लिए उगाई गई सरसों के लिए 250 से 400 एमएल मैंलाथियान 250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। अगर जरूरत हो तो 15 दिन में दोबारा फिर छिड़काव करें।

दीपक कुमार, एसडीओ रेवाड़ी।

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